जिला ग्रामीण विकास एजेंसियां ​​(डीआरडीए)

संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम.पी.लैड्स)

पृष्ठभूमि

आम जनता अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मूलभूत सुविधाओं के प्रावधान हेतु संसद सदस्यों (एम.पी) के पास जाती है।

प्रधानमंत्री ने 23 दिसम्बर, 1993 को संसद में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम.पी.लैड्स) की घोषणा की थी। आरंभ में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, ग्रामीण विकास मंत्रालय के नियंत्रण में थी।

योजना का अद्देश्य, संसद सदस्यों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के सृजन पर जोर देते हुए विकासात्मक प्रकृति के कार्यों की अनुशंसा करने हेतु सक्षम बना है।

वर्ष 1993-94 में जब योजना को लागू किया गया, प्रत्येक संसद सदस्य को 5 लाख रूपए की राशि आबंटित की गई थी, जो 1994-95 से प्रत्येक संसद सदस्य के निर्वाचन क्षेत्र के लिए 1 करोड़ रूपए प्रति वर्ष हो गई थी। 1998-99 से इसे बढ़ाकर 2 करोड़ रूपए कर दिया गया था तथा फिलहाल वित्तीय वर्ष 2011-12 से इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रूपए कर दिया गया है।

विशेषताएं

लोक सभा सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्रों के भीतर कार्यों की अनुशंसा कर सकते है। राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य, अपने निर्वाचन राज्य के भीतर कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं। राज्य सभा एंव लोक सभा, दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य देश में कहीं भी कार्यो की अनुशंसा कर सकते हैं

स्कीम के तहत अनुबंध-2 में प्रतिबंधित कार्यों के अलावा व सभी कार्य जो स्थानीय अवसंरचना और विकास की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हों और जिनका जोर निर्वाचन क्षेत्र में स्थायी परिसंपत्तियों के सृजन पर हो, एमपीलैड्स के अतर्गत अनुमेय है। अनुबंध-2 क में दी गई सूची के अनुसार अस्थायी प्रकृति की विशिष्ट मदों के संबंध में किया जाने वाला व्यय भी अनुमेय है।

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के निवास क्षेत्रों का विकासः- अनुसूचित जाति के लोगों के निवास क्षेत्रों के लिए कम से कम 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लोगों के निवास क्षेत्रों के लिए 7.5 प्रतिशत की लागत के कार्यों की अनुशंसा करनी होती है।

प्राकृतिक एंव मानव-निर्मित आपदाएं -बाढ़, चक्रवात, सुनामी, भूकंम, ओलावृष्टि, हिमस्खलन, बादल फटना एंव कीट-हमला, भूस्खलन, तूफान, अनावृष्टि, आग लगना, रासायनिक, जैविक एंव रेडियोलाॅजिकल खतरों जैसी आपदाओं की संभावना वाले अथवा उनसे प्रभावित क्षेत्रों में भी एमपीलैड्स कार्यों को कार्यान्वित किया जा सकता है। उक्त राज्य के अप्रभावित क्षेत्रों के लोक सभा सांसद, उस राज्य के प्रभावित क्षेत्रों में अधिकतम 25 लाख रूपये प्रति वर्ष तक के अनुमेय कार्यों की अनुशंसा कर सकते है।

जिला प्राधिकारी

सामान्य तौर पर जिला कलेक्टर/जिला मैजिस्ट्रेट/ उपायुक्त, जिले में एमपीलैड्स कार्यों के कार्यान्वयन के लिए जिला प्राधिकारी होंगे। नगर निगमों के संबंध में, आयुक्त/मुख्य कार्याकारी अधिकारी जिला प्राधिकारी के रूप में कार्य कर सकते हैं।

कार्यान्वयन एजेंसी

(क) जिला प्राधिकारी उपयुक्त कार्यान्वयन एजेंसी का चयन करेगा जिसके माध्यम से संसद सदस्य द्वारा संस्तुत किसी कार्य विशेष को निष्पादित किया जाएगा।
(ख) कार्यान्वयन एजेंसी का चयन इस प्रयोजनार्थ राज्य सरकार के नियमों/दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा। बशर्ते कि कतिपय केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/संगठनों (जैसे रेलवे) में कतिपय कार्यों के संबंध में जहां कार्यान्वयन एजेंसी आवश्यक रूप से केन्द्र सरकार का संबंधित मंत्रालय/संगठन होगी, कार्यान्वयन एजंेसी के रूप में उसी का चयन किया जाएगा।

स्कीम के तहत कार्यों की सूची

पेयजल सुविधा, शिक्षा, विद्युत सूविधा, स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण, सिंचाई सुविधाएं,  गैर-पारम्परिक उर्जा स्त्रोत, रेलवे, सड़कें, पगडंडी और पुल, सफाई और जन स्वास्थ्य, खलेकूद, पशु देखभाल, डेयरी तथा मत्स्य पालन संबंधी कार्य, कृषि से संबंधित कार्य, स्कूलों में शौचालयों का निर्माण, सौर लाइट की व्यवस्था, पशुओं को ले जाने तथा लाने के लिए एम्बुलेंस/शव वाहन, सुविधा केन्द्र, कम्प्यूटरों की खरीद, विकलांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए हस्त चालित/बैटरी, एवं हथकरघा बुनकरों के लिए कलस्टर विकास से संबंधित कार्य के क्षेत्रों, वगैराह में संसद सदस्य निधि जारी कर सकते है।

निधि जारी करना और उसका प्रबंधन

भारत सरकार द्वारा 5 करोड़ रूपए की वार्षिक पात्रता 2.5-2.5 करोड़ रूपए की दो समान किस्तों में सीधें संबंधित संसद सदस्य के नोडल जिले के जिला प्राधिकारी को जारी की जाएगी।

कार्यो को सम्पन्न करना/खातों को समायोजित करनाः-स्कीम के कार्य राज्य सभा सांसदों के मामले में कार्यालय छोड़ने की तारीख से अथवा लोक सभा के विघट की तिथि से 18 माह के भीतर पुरा किया जाएगा।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

इस अधिनियम का मूल उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के ऐसे प्रत्येक परिवार को एक वित्त वर्ष के दौरान कम से कम 100 दिन का गारंटी शुदा रोजगार उपलब्ध कराना है

योजना का लाभ

  • योजना द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार की आजीविका (रोजी-रोटी) की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक वितीय वर्ष में परिवार को कम से कम 100 दिन का अकुशल शारीरिक रोजगार देना।
  • टिकाऊ व लम्बे समय तक काम आपे वाली सामुदायिक, सामाजिक और आर्थिक परिसम्पतियों, जैसे नाले, तलाब, कच्ची सड़कें, वन आदि का निर्माण।
  • महिलाओं पुरूषों को समान वेतन दर।

सहायता प्राप्त करने का तरीका

  1. कार्य करने का इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत में अपने व्यस्क सदस्यों के नाम, उम्र, लिंग और पता देकर पंजीकरण करवा सकता है। यह पंजीकरण 5 वर्ष तक के लिए मान्य है। पंजीकरण के लिए सादे कागज पर आवेदन दिया जा सकता है।
  2. पंजीकरण के लिए ग्राम पंचायत  के समक्ष मौखिक आग्रह किया जा सकता है। ग्राम पंचायत पंजीकृत परिवारों को फोटो युक्त जाब कार्ड जारी करेगी। जाॅब कार्ड 5 वर्ष के लिए मान्य होगा व जाॅब कार्ड पर एक स्पेशल (खास) पंजीकरण नम्बर अंकित होगा।
  3. रोजगार पाने के लिए पंजीकृत परिवारों के प्रत्येक व्यस्क सदस्य को अधिकार है कि वह ग्राम पंचायत का कार्यक्रम अधिकारी (बी0डी0पी0ओ0) को लिखित आवेदन दे और तारीख युक्त पावती (रसीद) प्राप्त करें। आवदेन लागातार कम से कम 14 दिन के काम/रोजगार के लिए दिया जायेग।
  4. आवदेन करने अथवा रोजगार की मांग करने के 15 दिन के अन्दर ग्राम पंचायत द्वारा रोजगार उपलब्ध करवाया जायेगा
  5. ग्राम पंचायत आवदेक को 15 दिन के अंदर यह सूचित करेगी के कब, कहां व किस काम के लिए उपस्थित होना है यह सूचना ग्राम पंचायत के सूचनापट्ट पर, पत्र के माध्यम से या सार्वजनिक रूप से लगाई जायेगी।
  6. रोजगार के इच्छुक व्यक्तियों को आवेदन जमा करने के 15 दिनांें के भीतर रोजगार दिया जायेगा। कार्य गांव से 5 किलोमीटर के अन्दर दिया जायेगा। यदि कार्य गांव से 5 कि0मी के दूर दिया जायेगा तो 10 रुपये अतिरिक्त वेतन का भुगातन यातायात भते/दैनिक भते के रूप मे किया जायेग।

लाभार्थी

मनरेगा के अन्तर्गत काम करने के लिए प्रत्येक वह परिवार योग्य है, जो उस ग्राम पंचायत का स्थायी निवासी है।

  • वे परिवार जो कुछ समय के लिए काम की खोज में गांव से बाहर चले जाते हैं लेकिन उनके लौट आने की उम्मीद हो वे भी इसके अन्तर्गत काम कर सकते है।
  • वे सभी ग्रामीण परिवार जो शारीरिक अकुशल रोजगार चाहते है।
  • बी0पी0एल0 एवं ए0पी0एल0 परिवारों का अधिनियम में कोई बन्धन नही है।
  • सरकारी कर्मचारियों के परिवार के सदस्य भी मनरेगा में कार्य कर सकते हैं। वह स्वयं नहीं।

बूढ़े और विकलांग व्यक्ति जो काम करने के झच्छुक हों वो भी लाभार्थी हो सकते है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण।

भारत सरकार के 2022 तक सभी को मकान दिलवाने के लक्ष्य निर्धारण के तहत सरकार के ग्रामीण मंत्रालय ने दिनांक 23.03.2016 को इन्दिरा आवास योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के रूप में पुनर्गठित किया है। जिसकी निम्नलिखित विषेशताएं है।

  1. वर्ष 2016-17 से 2018-19 के अन्तर्गत 1 करोड़ ग्रामीण परिवारों को मकान हेतू आर्थिक सहायत प्रदान की जायेगी।
  2. मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता को 70 हजार रू0 से बढाकर 1 लाख 38 हजार किया गया है जिसमें 18 हजार रू0 राज्य सरकार वहन करेगी।
  3. पी0एम0ए0वाई0 स्कीम का बवदअमतहमदबम मनरेगा स्कीम के साथ किया गया जिसके अन्तर्गत लाभार्थियों को 90-95 अकुशल मानव कार्य दिवस का भुगतान किया जायेगा।
  4. लाभार्थियों की पहचान एवं चयत ग्राम सभा के माध्यम से सामाजिक आर्थिक व जातीय जनगणना-2011 सर्वेक्षण सूची में से आवास की कमी और अन्य सामाजिक अभाव मापदण्डों के आधार पर किया जायेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना की सूचि में से अपात्र परिवारों को बाहर निकालने तथा पात्र परिवारों को शामिल करने के मापदण्ड

अपात्र परिवारों को बाहर निकालने के मापदण्ड

जो परिवार निम्नलिखित मापदण्डों में से कोई एक पूरा करता है तो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना की सूचि से बाहर कर दिया जाएगा

  1. ऐसे सभी परिवार जिनके पास पहले से ही पक्का मकान है ।
  2. ऐसे परिवार जिन्हौंने पहले ही केन्द सरकार या राज्य सरकार की किसी योजना से पक्का मकान बनाने हेतु अनुदान प्राप्त किया हुआ है ।
  3. जिस परिवार के पास दोपहिया, तिपहिया या चार पहिया मोटर वाहन तथा मछली पकडने की नाव ।
  4. मोटर से चलने वाले तिपहिया या चार पहिया कृृशि संयत्र ।
  5. 50000.00 रु0 की लिमिट का क्र्रैडिट कार्ड धारक ।
  6. परिवार का कोई भी सदस्य यदि सरकार कर्मचारी/अधिकारी हो ।
  7. परिवार जो गैर कृषि उद्यमी के रूप में सरकार के साथ पंजीकृत हो ।
  8. परिवार का कोई भी सदस्य यदि 10000.00 प्रति माह से अधिक कमा रहा हो ।
  9. जो आयकर दाता हो, 10. जो पेशेवर टैक्स अदा करता हो ।
  10. जिस परिवार के पास फ्रिज/रैफरीजीरेटर हो ।
  11. जिस परिवार के पास लैन्डलाईन फोन हो ।
  12. जिस परिवार के पास कम से कम एक सिंचाई संयत्र के साथ 2.5 एकड या इससे ज्यादा सिंचित भूमि हो ।
  13. जिस परिवार के पास 5 एकड या इससे अधिक सिंचित भूमि दो या ज्यादा फसलो के लिए हो ।
  14. जिस परिवार के पास 7.5 एकड भूमि कम से कम एक सिंचाई संयत्र के साथ उपलब्ध हो ।

स्वतः शामिल करने के मापइण्ड

  1. जिस परिवाार के पास आश्रय ना हो, 2. निराश्रित/भिक्षा पर निर्भर हो, 3.मैला ढोने वाले, 4. आदिम जनजातिय समूह, 5. कानूनी रूप से बंधुआ मजदूरी से छुडवाये गये परिवार ।
  • एसईसीसी डेटा को प्रधानमंत्री आवास योजना ;ग्रामीणद्ध के लिए ग्राम सभा में प्रस्तुत करने का तरीका

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर राज्य सरकार द्वारा एसईसीसी डेटा 2011 में से एक सूचि उपलब्ध कराई गई है जो निम्न प्रकार से तैयार की गई है

  1. पक्के मकानों को बाहर निकालना – ऐसे सभी मकान जिनकी छत या दीवार पक्की है, उन्हें बाहर निकाला गया है ।
  2. स्वतः शामिल करना – बचे हुए परिवारों की सूचि में से ऐसे सभी परिवार जो एनैक्सर-1 में दर्शाये गये 13 मापदण्डों में से किसी एक में आते हैं को स्वतः सूचि से बाहर किया गया है ।
  3. सभी बेघर परिवार और ऐसे परिवार जो शून्य/एक/दो कमरों के मकान जिनकी छत और दीवार कच्ची है, बाहर निकालने की प्रकिंया के बाद बचते हैं की एक सूचि बनेगी । ग्राम सभा के स्तर पर पात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक तथा अन्य वर्ग की सूचि अलग-2 तैयार की जाएगी । यदि कोई परिवार अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक दोनों में आता है तो उसे अनुसूचित/जनजाति में गिना जाएगा ।

प्राथमिकता सूचि बनाने की विधि

  1. ऐसे मकान जिसमें केवल एक ही कमरा कच्ची दीवार तथा कच्ची छत वाला हो ।
  2. ऐसे परिवार जिसमें 16 से 19 साल की उम्र के बीच का कोई वयस्क ना हो ।
  3. महिला मुखिया का परिवार जिसमें 16 से 59 वर्ष के बीच का कोई वयस्क सदस्य ना हो ।
  4. ऐसे परिवार जिसमें कोई सदस्य दिव्यांग हो या कोई सक्षम/समर्थ अदिव्यांगद्ध वयस्क सदस्य ना हो ।
  5. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति परिवार।
  6. ऐसा परिवार जिसमें 25 साल से उपर का कोई शिक्षित वयस्क ना हो ।
  7. ऐसा परिवार जिसमें भूमिहीन परिवारों का मार्गदर्शन आकस्मिक श्रम से अपनी आय का बडा हिस्सा पाना हो।

स्कोर देने के लिए महत्वपूर्ण

यदि कोई परिवार उपरोक्त 7 मापदन्डों में से एक को पूरा करता है तो उसको एक स्कोर/अंक दिया जाएगा, दो को पूरा करता है तो दो अंक दियें जाऐगे अर्थात् जितने मापदन्ड पूरे करेगा उतने ही स्कोर/अंक   दिये जायेंगे । जिस परिवार को जितने ज्यादा अंक/स्कोर मिलेंगे उसका नाम प्राथमिकता सूचि में उतना ही उपर होगा । सबसे ज्यादा स्कोर वाले परिवार का नाम सबसे उपर होगा ।

  1. मकान से वंचितः- सभी परिवार शून्य, एक और दो कमरे के क्रम में प्राथमिकता पर रखे जायेंगे । इन ग्रुपों में जो परिवार स्वतः शामिल होने की शर्तें पूरी करते हैं, को फिर से प्राथमिकता प्रदान की जाएगी ।
  2. सामाजिक तथा आर्थिक रूप से वंचितः- यदि दो या अधिक परिवार एक ही प्राथमिकता पर आते हैं अर्थात् बराबर के अंक/स्कोर प्राप्त करते हैं तो उनकी प्राथमिकता निम्न मापदन्डों के आधार पर तैयार की जाएगीः-
  3. ऐसे परिवार जिसमें 16 से 19 साल की उम्र का कोई वयस्क ना हो ।
  4. महिला मुखिया का परिवार जिसमें 16 से 59 वर्ष का कोई वयस्क सदस्य ना हो ।
  5. ऐसा परिवार जिसमें 25 साल से उपर का कोई शिक्षित वयस्क ना हो ।
  6. ऐसे परिवार जिसमें एक सदस्य विकलांग हो या कोई समर्थ वयस्क सदस्य ना हो ।
  7. ऐसे परिवार जिसकी आमदनी का ज्यादातार हिस्सा हाथों के आकस्मिक श्रम से प्राप्त होता है।